मन के मुखौटे, एपिसोड 03: मैंने साफ किया तुम्हारा…

मानसिक स्वास्थ्य के तयशुदा खांचे से बाहर निकल, उसे आपबीती और जगबीती के अनुभवों एवं कहानियों के चश्मे से समझने की एक महत्वाकांक्षी पहल – मन के मुखौटे के ज़रिए हम एक बार फ़िर वापस मानसिक स्वास्थ्य की तरफ़ मुड़कर देख रहे हैं. इस पॉडकास्ट सीरीज़ के नए एपिसोड में हम देखभाल से जुड़े मुद्दों पर सवालों और अनुभवों के ज़रिए इसे समझने का प्रयास कर रहे हैं.

देखभाल के काम को लेकर हमारे बीच इतनी समझ तो बन चुकी है कि इसमें जितना शारीरिक श्रम लगता है उससे कहीं ज़्यादा मानसिक श्रम भी शामिल है. साथ ही जेंडर से जुड़े इसके गहरे रिश्ते की पड़ताल सामाजिक और अकादमिक दोनों ही तरीकों से की जा चुकी है. सवाल यह है कि किसी की देखभाल करने वाले ख़ुद अपने काम को कैसे देखते हैं? हमने मीना, परमेश्वर, एना, नीलिमा और बिंदु से बात कर उनसे इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की. उन्होंने कहा, “ये सब साफ़ रखना, यहां से हम शुरू करते हैं पर सफ़ाई दिखती कहां हैं?”

किसी के देखभाल की अपेक्षा किससे की जाती है और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ता है? बुरी तरह से थकान और निराशा के अलावा देखभाल करने वालों का मन कौन सी भाषा कहने की कोशिश करता है? इस काम में जाति और जेंडर की क्या भूमिका है? क्या ये काम सभी के लिए सामान्य है या किसी ख़ास जाति और जेंडर से जुड़े लोगों के ज़िम्मे ये काम आता है?

मन के मुखौटे के तीसरे एपिसोड – ‘मैंने साफ़ किया तुम्हारा…’ में हम एक नई कहानी के ज़रिए उन लोगों को भी सुनेंगे जो देखभाल के काम में लगे हुए हैं. उनके अनुभवों के ज़रिए हम इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करेंगे.

‘मैंने साफ़ किया तुम्हारा…’ कहानी मूलत: अंग्रेज़ी कहानी ‘आई क्लीन द-‘ का हिन्दी अनुवाद है. यह कहानी ग्रांटा वेबसाइट पर प्रकाशित हो चुकी है. इसका हिंदी अनुवाद माधुरी आडवाणी ने किया है. इस स्टोरी को 2021 कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

चित्रांकन: अम्बिका करंदिकर.

माधुरी को कहानियां सुनाने में मज़ा आता है और वे अपने इस हुनर का इस्तेमाल महिलाओं के विभिन्न समुदायों और पीढ़ियों के बीच संवाद स्थापित करने के माध्यम के रूप में करती हैं. जब वे रिकार्डिंग या साक्षात्कार नहीं कर रही होतीं तब माधुरी को यू ट्यूब चैनल पर अपने कहानियों का अड्डा पर समाज में चल रही बगावत की घटनाओं को ढूंढते और उनका दस्तावेज़ीकरण करते पाया जा सकता है. समाज शास्त्र की छात्रा होने के नाते, वे हमेशा अपने चारों ओर गढ़े गए सामाजिक ढांचों को आलोचनात्मक नज़र से तब तक परखती रहती हैं, जब तक कॉफ़ी पर चर्चा के लिए कोई नहीं टकरा जाता. माधुरी द थर्ड आई में पॉडकास्ट प्रोड्यूसर हैं.
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