मन के मुखौटे, एपिसोड 01: अड़ियल दुख

जन स्वास्थ्य विशेषांक में इस हफ़्ते हम आंखें बंद कर अपने मन-मस्तिष्क के भीतर झांकने की कोशिश कर रहे हैं. पब्लिक हेल्थ एवं पॉलिसी पर अभी तक हम कई तरह के सवाल-जवाब कर चुके हैं. इस बार बारी है स्वास्थ्य और सिस्टम के बीच मानसिक स्वास्थ्य को परखने एवं समझने की.

ये एक ऐसी कोशिश है जहां हम इलाज और बीमारी के दायरे से बाहर निकलकर जीवित इतिहास को महसूस कर रहे हैं. हमारी पॉडकास्ट सीरीज़ मन के मुखौटे, साहित्य और अनुभवी आवाज़ों के ताने की बहुत बारीक बुनाई है. जिसके ज़रिए हम दिल, दिमाग़ और मस्तिष्क को एक सीध में रख, हमेशा सच बयान करने वाले मन की गहराई में डूबने का प्रयास करेंगे.

मन के मुखौटे के पहले एपिसोड में हम कोरोना महामारी के पिछले 18 महीने के मानसिक और भावनात्मक अनुभवों को ऑडियो के ज़रिए सामने ला रहे हैं, जिसने न जाने कितने लोगों की ज़िंदगियां बदल दी हैं. इस सीरीज़ की पहली कहानी लेखक अहाना चौधरी की लिखी – ग्रीफ़ इज़ ए स्टबर्न एनिमल से साभार है. इसका हिन्दी तर्जुमा माधुरी आडवाणी ने ‘अड़ियल दुख’ के नाम से किया है. इसमें अलग-अलग तरह के लोगों की आवाज़ें हैं जिन्होंने बहुत प्यार और आत्मियता से अपना दुख हमसे साझा किया.

यह कहानी सबसे पहले Soup वेबसाइट पर प्रकाशित हुई थी – https://thesoup.website/

चित्रांकन: कादंबरी  मिश्रा 

माधुरी को कहानियां सुनाने में मज़ा आता है और वे अपने इस हुनर का इस्तेमाल महिलाओं के विभिन्न समुदायों और पीढ़ियों के बीच संवाद स्थापित करने के माध्यम के रूप में करती हैं. जब वे रिकार्डिंग या साक्षात्कार नहीं कर रही होतीं तब माधुरी को यू ट्यूब चैनल पर अपने कहानियों का अड्डा पर समाज में चल रही बगावत की घटनाओं को ढूंढते और उनका दस्तावेज़ीकरण करते पाया जा सकता है. समाज शास्त्र की छात्रा होने के नाते, वे हमेशा अपने चारों ओर गढ़े गए सामाजिक ढांचों को आलोचनात्मक नज़र से तब तक परखती रहती हैं, जब तक कॉफ़ी पर चर्चा के लिए कोई नहीं टकरा जाता. माधुरी द थर्ड आई में पॉडकास्ट प्रोड्यूसर हैं.
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