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अंक 006: मज़ा और खतरा
अंक 006
मज़ा और खतरा
अवचेतन: यौनिकता को देखने का एक नज़रिया
June 2025
इस संस्करण के ज़रिए हम मानवीय अनुभवों को समझने और देखने का प्रयास कर रहे हैं – खासकर हमारी इच्छाएं, यौनिकता, सेक्स, शरीर, उम्र, हिंसा, भूख और प्यास जो आपस में एक-दूसरे से टकराते हैं – इन्हें हम अवचेतन की नज़र से देखने की कोशिश करेंगे.
संपादकीय पढ़ें
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December 10, 2025
अवचेतन और यौनिकता शृंखला l भाग 4: यमी-यकी
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चौथे भाग में नारीवादी कार्यकर्ता और लेखक जया शर्मा अपने विश्लेषण के ज़रिए बता रही हैं कि कैसे हमारी सबसे...
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लेखक प्रियंवद की कहानी ‘खरगोश’ कामना के भंवर में उपजे तनावों की कहानी है तो वहीं एक किशोर मन में...
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