निरंतर रेडियो

यहां हम आवाज़ का सहारा लेते हुए पॉडकास्ट, कहानियां, किस्से और बातें रेडियो पर लाते हैं. ये रोज़मर्रा के अनुभव हमारे आस पास से लेकर सामाजिक नीतियों तक को समझने में मदद करते हैं. ये संवाद जेंडर और पितृसत्ता पर ठोस समझ बनाने का प्रयास हैं.

कोरोनाकाल और मैं – अकेले हैं तो क्या ग़म है?!

कोरोना की दूसरी लहर अब मद्धम पड़ रही है. लॉकडाउन खुल रहे हैं. धीरे-धीरे बाहर की दुनिया के पर्दे उठने लगे हैं. लेकिन, भीतर अब भी बहुत कुछ अंधेरे में हैं. कोई था जो अब नहीं है, हंसी-आंसू, आवाज़-स्पर्श, भाग कर गले लगा लेने की दबी इच्छाएं…इनके बीच से गुज़रती ज़िन्दगी. इस एपिसोड में हम उन लोगों से बात करेंगे जो इस महामारी में अकेले अपने को संभाल रहे हैं.

बोलती कहानियां: बेटा किसका?

बोलती कहानियां में अनीता हमारे लिए फील्ड से कहानियां और चर्चाएं लेकर आती हैं. इस एपिसोड में आइए सुनते हैं ‘बेटा किसका?’ और जानते हैं कि इस सवाल पर कैसे वीरमति ने सबकी बोलती बंद की.

काम या आराम: गैस पर देख लेना

मलयालम फिल्म #TheGreatIndianKitchen आजकल बहुत पसंद की जा रही है. हमने जब इसे देखा तो लगा कि क्यों न हम भी आपके साथ रसोई का एक चक्कर लगा ही लें.

रोटी बनाए टंटू

बोलती कहानियां: रोटी बनाए टंटू

जहां अनीता हमारे लिए फील्ड से कहानियां और चर्चाएं लेकर आती हैं. कहानियां, जो निरंतर की ‘आपका पिटारा’ पत्रिका में छापी गईं और फील्ड में काफी सुनी और सुनाई गईं.

स्टे होम, कितना सुरक्षित? भाग 1

स्टे होम, कितना सुरक्षित? भाग 1

हमने तालाबंदी के दौरान घरेलू हिंसा बहुत अधिक बढ़ जाने के बारे में सुना है. ‘स्टे होम, कितना सुरक्षित’ के पहले एपिसोड में हम मिल रहे हैं…

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