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अंक 003 : शहर
अंक 003
शहर
शहर अकेला है, लाख हैं गलियां
October 2021
कल्पनाओं और जगमगाती रौशनियों का शहर. तमन्नाओं और चाहतों का शहर. विस्थापन के दंश के साथ जीता शहर तो सपनों के टूटने और पूरे होने का शहर. आकर्षण और इससे दूर भागने की कशमकश, ये सब एक ही शहर के भीतर हैं.
संपादकीय पढ़ें
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फिल्मी शहर एपिसोड 3: सिनेमा में समलैंगिकता
द थर्ड आई टीम
इस मास्टरक्लास के दो भागों में - सिनेमा में समलैंगिकता - विषय पर बातचीत करते हुए फिल्म निर्देशक अविजित मुकुल...
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