बीमा के लेख

बीमा (लेखक का बदला हुआ नाम), अपनी कहानियों के ज़रिए यौनिकता, जाति और चाहतों के बीच क्या रिश्ता है इसे देखने, जानने-समझने का काम करते हैं. अड्डा, वासाफिरी, आउट ऑफ प्रिंट जैसी पत्रिकाओं में उनके लेख और कहानियां कुछ प्रकाशित हो चुकी हैं और कुछ शीघ्र प्रकाश्य हैं.

दो पहाड़ों के बीच

जब मैं उस मशहूर हिल स्टेशन के बस स्टैंड पर उतरा, तो मेरे मन में एक ही सवाल घूम रहा था, क्या वह आएगी? बीती रात मैंने उसे कई मैसेजेज़ भेजे थे, आखिर के कुछ मैसेज उसने अभी तक नहीं देखे थे, मतलब उनपर ब्लू टिक नहीं लगा था. रात ढल चुकी थी, लेकिन पौ फटने में अभी वक्त था.