काजल सिंह के लेख

काजल सिंह, सामाजिक बदलाव से जुड़ी कार्यकर्ता हैं और वर्तमान में द जेंडर लैब संस्था के साथ काम कर रही हैं. मुम्बई में जन्मी और वहीं पली-बढ़ी काजल ने अपनी पढ़ाई एकाउंटिंग और फाइनेंस में पूरी की है. पर लंबे समय से वे नारीवादी और सामाजिक न्याय से जुड़े समूहों और पहलों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं.

काजल की रुचि और काम जेंडर और पहचान के अंतर्संबंधों को समझने में है. वे उन कहानियों और अनुभवों को सामने लाने की कोशिश करती हैं जो अक्सर अनसुने या अदृश्य रह जाते हैं. चाहे मुंबई की लोकल ट्रेनों की भागदौड़ हो या मरीन ड्राइव की शांति, काजल जेंडर मानदंडों को चुनौती देने के विभिन्न आयामों को समझने और नारीवादी मूल्यों को आशा, जिज्ञासा और संवेदनशीलता के साथ अपने जीवन और काम में उतारने की कोशिश करती रहती हैं.

सवाल ही सवाल हैं, सूझता नहीं कोई रास्ता

किशोरावस्था में मन के भीतर जिज्ञासाओं का अंबार होता है. दोस्तों के बीच होने वाली फुसफुसाहटे, मैग्ज़ीन के पन्नों में छपी तस्वीरें या टीवी पर दिखाई देने वाले दृश्य मन में तरंगों पैदा करती हैं. एकतरफ मज़ा आता है तो दूसरी तरफ डर लगता है कि ये जो महसूस हो रहा है, ये क्या है?