“आपकी नज़र गंदी है, हमारा खेल नहीं”
बिहार के पनसेरवा गांव में फ्रिस्बी खेल रही लड़कियों को ऊंची जाति के दबंग रोकने की कोशिश करते हैं. लड़कियां इन दबंगों के सामने झुकने से इंकार कर देती हैं और एक युवा कार्यकर्ता उनके साथ खड़ा होता है. अब खेल और पितृसत्ता के बीच इस टकराहट का साक्ष्य पूरा गांव है. तन्मय अपने निबंध में इस टकराव की ज़मीन पर खड़े होकर ग्रामीण बिहार की एक तस्वीर हमारे सामने रखते हैं और साथ ही इस भ्रम को तोड़ते हैं कि खुशी में नुकसान की गुंजाइश नहीं होती.