#21sekyahoga

भारतीय महिलाओं की शादी की वैधिक उम्र में किए जा रहे बदलाव का आप पर क्या असर पड़ेगा?

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बुलंद आवाज़ें का पहला खण्ड, भारतीय महिलाओं की शादी की वैधिक उम्र में किए जा रहे बदलाव की पड़ताल करता है. सरकार ने घोषणा की है कि वह महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ा कर 21 साल करना चाहती है ताकि “मातृ-मृत्युदर में कमी हो सके और पोषण के स्तर में बढ़ोतरी हो”.

घोषणा के तुरंत बाद ही, एक टास्क फोर्स का गठन किया गया और उनसे सिफारिशें मांगी गईं. 96 स्वयं सेवी संस्थाओं ने सामूहिक रूप से मिलकर 26 जून, 2020 को ‘यंग वॉइसेस’ प्रक्रिया की शुरुआत की. उन्होने 2500 भारतीय युवाओं से बात की. निरंतर ट्रस्ट इस सामूहिक प्रक्रिया का हिस्सा थी.

टास्क फोर्स का काम था कि वह शादी व मातृत्व और स्वास्थ्य, चिकित्सा, सुखी जीवन व पोषण के स्तर के बीच संबंध की जांच करें. साथ ही लड़कियों की उच्च स्तरीय शिक्षा पर इसके असर का भी पता लगाए.

इस प्रक्रिया से एक जटिल वास्तविकता उभरी, जिसे टास्क फोर्स द्वारा साक्षात्कार की गई लड़कियों ने बखूबी इस सवाल के रूप में व्यक्त किया – 21 से क्या होगा? (#21sekyahoga?)

आगामी हफ्तों में, हमारी ऑडियो-विज़ुअल शृंखला आपके सामने उस दुनिया की परतें खोलेगी जिसमें बड़ी संख्या में भारत के युवा लड़के और लड़कियां रहते हैं. जहां चयन का अधिकार एक कल्पना जैसा है, इच्छाओं का अपराधीकरण किया जाता है, जाति और समुदायिक हितों का बोलबाला है और शिक्षा आज भी एक विशेषाधिकार की तरह है. शादी की वैधिक उम्र में बदलाव के दिखाई दे रहे प्रभावों से कहीं अधिक जटिल प्रभाव हैं.

अगले तीन महीने में, ये शृंखला व्यक्तियों, युवा समूहों/संगठनों, कलेक्टिव और संस्थाओं की आवाज़ों पर रोशनी डालेगी ताकि टास्क फोर्स के काम को आगे बढ़ाया जा सके.

आपकी आवाज़

हम जानना चाहते हैं कि आप क्या सोचते हैं, आपने क्या देखा है, आप क्या महसूस करते हैं, ऐसे क़ानूनों के बारे में जो आपको सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं.

इसमें भाग लेने के लिए आप हमें अपना साउंड नोट यानी अपनी आवाज़ रिकॉर्ड कर, रील या वीडियो बना कर 9871499818 पर भेजें या मेल करें: [email protected]. इसे हम ऑडियोग्राम/वीडियो में बनाएंगे, जिससे आप इसको सांझा कर सकें. इस तरह से आपकी आवाज़ सीधी उन तक पहुंचेगी, जिन्हें इसे सुनने की ज़रूरत है.

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