
फ से फील्ड, इश्श से इश्क: पहली रात
शादी के बाद पहली रात। एक तरफ नींद की खुमारी तो दूसरी तरफ बात करने की बेचैनी. इन दोनों के बीच वो सब कुछ जो शादी की पहली रात अपने भीतर समेटे होती है. आखिर पहला कदम कौन बढ़ाए?!
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शादी के बाद पहली रात। एक तरफ नींद की खुमारी तो दूसरी तरफ बात करने की बेचैनी. इन दोनों के बीच वो सब कुछ जो शादी की पहली रात अपने भीतर समेटे होती है. आखिर पहला कदम कौन बढ़ाए?!

एक बड़ी उम्र के आदमी और एक युवा लड़की की बेमेल शादी की कहानी – अमरबेल! इस्मत चुगताई की तीखी नज़र इस कहानी में रिश्तों की बारीकियों, सामाजिक ताने-बाने के दबाव और युवावस्था के साथ बुढ़ापे के टकराव को मार्मिक रूप से दर्शाती है.

शादी के एक साल के भीतर ही फुलेसरा के पति की मृत्यु हो जाती है. पति के जाने के बाद जो एक चीज़ उसके साथ होती है वह है- डर. पति के जाने के बाद खूबसूरत आंखों वाली फुलेसरा की बहु को समाज डायन करार दे देता है और वह गांव-समाज से अलग कर दी जाती है. फुलेसरा की बहु की ज़िंदगी क्या मोड़ लेती है? सुनिए बोलती कहानियां का ये विशेष एपिसोड ‘फुलेसरा बहू की आंख’.

“बाबा, कोई डायन कैसे बनती है?” सूखी झील के किनारे खड़े होकर भागीरथ जब यह सवाल अपने पिता मलिंदर से पूछता है, उस वक्त उसकी बिछड़ी हुई मां की परछाई उसके ऊपर मंडरा रही होती है. महाश्वेता देवी की कहानी बायन में भागीरथ अपनी मां को याद करता है और यह जानने की कोशिश करता है कि कैसे उन्हें डोम समुदाय ने बायन (डायन) कहकर अलग कर दिया.

दक्ष पॉडकास्ट (DAKSH Podcast) आम जनता को सार्वजनिक संस्थानों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जोड़ने की कोशिश करता है. पॉडकास्ट के अब तक के तीन सीज़न में कई मुद्दों पर बातचीत सुनने को मिलती है. जैसे भारत में पुलिसिंग, संविधान सभा में महिलाएं, न्यायपालिका में एआई आदि.

पूर्वी दिल्ली का इलाका खिचड़ीपुर, यहां छह नंबर की गली में रहने वाली नौ साल की एक लड़की किडनैप हो गई. न जाने कौन उसे उठा कर ले गया. इस खबर को सुनकर आठ नंबर की गली में रहने वाली सातवीं क्लास की काव्या के होश गुम हो गए. उस वक्त उसकी मम्मी घर पर नहीं थी. आज वह आएंगी भी देर से.

उसे अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए पैसों की ज़रूरत थी. उसने बहुत सारी तरकीबें सोच रखी थीं जिनसे घरवालों से पढ़ाई के लिए पैसा भी निकाल ले और उन्हें पता भी न चले पर उसके पिताजी हमेशा उसकी तरकीबों से एक कदम आगे की सोच रखते हैं. सुनिए एक पिता और एक बेटी की कहानी.

“छोटी बहू, अरे ओ छोटी बहू…” घर में सुबह से लेकर रात तक बस यही एक राग सुनाई देता है. घर हो या बाहर या फिर काम की जगह, उसका पूरा दिन सिर्फ़ भागते-दौड़ते ही बीत जाता. कभी शरारती सुनिता के नाम से मशहूर,आज वो सिर्फ़ छोटी बहू बनकर रह गई है…क्या है छोटी बहू की कहानी सुनिए राजकुमारी और आरती अहिरवार की ज़ुबानी.

‘ये इश्क नहीं आसां इतना ही समझ लीजे, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है’. इश्क मजाज़ी, इश्क मजनूंई कुछ भी कह लीजिए, पर जब चाहतें फ्रेंड रिक्वेस्ट की शक्ल में भेजी जाती हैं और कबूल कर ली जाती हैं तो दिल अपनी कुर्सी से उछल पड़ता है.

राजस्थान के जोधपुर जिले, एक छोटे से कस्बे में एक शाम विकास अपने खत्री होस्टल से निकलकर ओसवाल होस्टल की तरफ बढ़ा जा रहा था. ओसवाल होस्टल के पास जियो का नया टावर लगा है जहां इंटरनेट की स्पीड बहुत तेज होती है. विकास वहां फ़िल्में डाउनलोड करने जा रहा है. समानांतर उसके दिमाग में कुछ सवाल भी डाउनलोड हो रहे थे. जैसे, किस तरह जेंडर, जाति और वर्ग से तय होता है कि किसे क्या सुविधाएं मिलेंगी?