कहानी

घासवाली_प्रेमचंद

बोलती कहानियां Ep 10: घासवाली

मुंशी प्रेमचंद की कहानी घासवाली सबसे पहले 1929 में हिंदी में प्रकाशित होने वाली पत्रिका माधुरी में प्रकाशित हुई थी. सहमति और यौनिकता पर बात करती इस कहानी को जाति, जेंडर, यौनिकता एवं अन्य संदर्भों में कार्यशालाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है.

सहमति_खरगोश

खरगोश

लेखक प्रियंवद की कहानी ‘खरगोश’ कामना के भंवर में उपजे तनावों की कहानी है तो वहीं एक किशोर मन में उपजी सैकड़ों भावनाओं की कहानी भी है. एक कस्बाई शहर की गलियां, गंध, धूप, छत, सीढ़ियों और उसके रिदम में बंटू, बंटू के अविनीश भाई और अविनीश भाई की मृत्यु- खरगोश इन्हीं किरदारों के इर्ग-गिर्द घूमती है.

जंगल

फ से फील्ड, इश्श से इश्क: टीस

“कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भरे भौन मैं करत हैं, नैननु ही सब बात।।”

इस कहानी मे हल्की खुमारी है, वो जो हो सकता था पर हुआ नही. पर वो ऐसा है जो चुपके-चुपके होता भी रहा. ये कैसा इश्क है भला?

जंगल

फ से फील्ड, इश्श से इश्क: उपन्यास

किताबें बहुत सी पढ़ी होंगी तुमने, मगर कोई चेहरा भी तुमने पढ़ा है? लक्की ने जब पढ़ने की कोशिश की तो हवाएं थम सी गईं, पृथ्वी ने घूमना बंद कर दिया… क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है?

जंगल

फ से फील्ड, इश्श से इश्क: गुड टच बैड टच

किसी के हल्का सा छू लेने भर से सामने वाले की इंटेंशन को समझ लेना लड़कियों के भीतर ‘गॉड गिफ्टेड’ क्वालिटी है. विधि के लिए अब टाइम था इसे इस्तेमाल करने का क्योंकि अयान ने उसे घर बुलाया है. आखिर विधि को अयान के बारे में क्या पता चला?

जंगल

फ से फील्ड, इश्श से इश्क: पहली रात

शादी के बाद पहली रात। एक तरफ नींद की खुमारी तो दूसरी तरफ बात करने की बेचैनी. इन दोनों के बीच वो सब कुछ जो शादी की पहली रात अपने भीतर समेटे होती है. आखिर पहला कदम कौन बढ़ाए?!

जंगल

फ से फील्ड, इश्श से इश्क: शादी

हिन्दुस्तान में शादी होती दो लोगों के बीच है लेकिन शादी के माहौल में न जाने कितने जोड़े बनते हैं, कितने ख्वाब बुने जाते हैं, ख्वाहिशें उड़ानें भरती हैं… पर इनमें से एक भी अगर हकीकत में बदल जाए तो पसीने छूट जाते हैं!

रोमांस

दो पहाड़ों के बीच

जब मैं उस मशहूर हिल स्टेशन के बस स्टैंड पर उतरा, तो मेरे मन में एक ही सवाल घूम रहा था, क्या वह आएगी? बीती रात मैंने उसे कई मैसेजेज़ भेजे थे, आखिर के कुछ मैसेज उसने अभी तक नहीं देखे थे, मतलब उनपर ब्लू टिक नहीं लगा था. रात ढल चुकी थी, लेकिन पौ फटने में अभी वक्त था.