बुलंद आवाज़ें

एक त्रैमासिक शृंखला जो मुख्य विचारों, योजनाओं में हुई तब्दीलियों और सांस्कृतिक बदलावों को सीधा फील्ड में ले जाकर जांचती है. यह सच की तलाश में जनमानस आधारित खोज है. ऐसा सच जिसे वे आवाज़ें बता रही हैं जिन्हें अक्सर सुना नहीं जाता. यह शृंखला पहल (एडवोकेसी), योजनाओं और देश में चल रही बहसों को नए संवादों और आगामी अंतर्विरोधों के लिए खोलती है.

#21seKyaHoga: शादी से पहले प्यार| भाग 4 

क्या एक लड़की ये चुन सकती है कि वह किस से और कब प्यार करेगी? क्या एक लड़का किससे शादी करेगा इसका चुनाव कर सकता है? अगर एक लड़की या लड़का अपने साथी को ‘हां’ बोलते हैं तो क्या उनके प्यार के अस्तित्व में रहने, फलने-फूलने के लिए समाज में जगह है?

मेरी इच्छा का क्या

#21seKyaHoga: मेरी इच्छा का क्या? | भाग 3

हम किसे, कब और कैसे प्यार करते हैं, क्या इसे कानून नियंत्रित कर सकता है? क्या एक औरत की इच्छा पर और पहरा लगाया जा सकता है?

स्कूल कहां हैं

#21sekyahoga: स्कूल कहां हैं?

शादी की उम्र बड़ा देने से शिक्षा का बुनियादी ढांचा कैसे हम तक पहुंच जाएगा? अलवर, राजस्थान की लड़कियों ने पूछा. अगर कोई स्कूल ही नहीं है, आने- जाने के लिए परिवहन की सुविधा नहीं है. शादी की कानूनन उम्र बदल कर 21 करने से हमें स्कूल जाने में कैसे मदद मिलेगी?

ड्रॉपआउट

#21sekyahoga: ड्रॉप आउट लड़कियां

‘बुलंद आवाज़ें’ शृंखला में जिस पहले मुद्दे पर हम बात करने जा रहे हैं, वो है – भारत में लड़कियों की शादी की तय की गई कानूनन उम्र में किया जा रहा बदलाव.

#21sekyahoga

#21sekyahoga

बुलंद आवाज़ें का पहला खण्ड, भारतीय महिलाओं की शादी की वैधिक उम्र में किए जा रहे बदलाव की पड़ताल करता है.