समाज

जहां हम राज्य, कानून, जाति, धर्म, अमीरी–ग़रीबी और परिवार की मिलती बिछड़ती गलियों के बीच से निकलते हैं और उन्हें आंकते हैं. यह समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे ये ढांचे अपने आप को नए ढंग और नए रूप से संचित करते हैं, फैलते और पनपते हैं. इस सबमें पितृसत्ता जीवन के अलग–अलग अनुभवों पर कैसे अपनी छाप छोड़ती है.

आशा कार्यकर्ता

“हम दुनिया की सबसे बड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य वर्कफोर्स हैं और हम एक दिन इतिहास बनाएंगी”

एक पत्रकार के रूप में मैंने जितने सालों भी काम किया है, मुझे हर जगह की आशा कार्यकर्ता (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) की कहानियां याद हैं. ये वो कहानियां हैं जो किसी ‘सुपरहीरो’ किस्म की फिल्मी कहानियों में एकदम से फिट बैठती हैं, जहां पर्दे पर अचानक एक आदमी की एंट्री होती है जो कयामत की ओर बढ़ रही दुनिया को कैसे भी करके बचाता है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. पर यहां, ‘हीरो’ देश भर की ये औरतें हैं. उनकी एंट्री में कोई रोमांच नहीं है; ये औरतें पहले से ही मौजूद हैं और शायद आपके पड़ोस में ही रहती हों.

अंधेरा

अंधेरे के बिना प्रेमी जोड़े कहां जाएं?

अंधेरे ने हमेशा से ही कवियों की कल्पना के लिए खाद-पानी का काम किया है. खालीपन या रिक्तता से भरी जगह जो सितारों को चमकने का मौका देती है और अक्सर जहां डरावनी फिल्में फिल्माई जाती हैं. लेकिन हम जिस तरह से रहते हैं उसके बारे में यह अंधेरा क्या कहता है?

महिला हेल्पलाइन नंबर_वन स्टॉप सेंटर

वन स्टॉप सेंटर और न्याय तक महिला की पहुंच

2015 में निर्भया केस के दौरान बड़ी संख्या में देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने 36 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) स्थापित किए. ओएससी का काम पीड़ित या सर्वाइवर महिला के लिए न्याय की अलग-अलग व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं, जैसे पुलिस, हॉस्पिटल और कोर्ट, को एक जगह केंद्रित करना है. साथ ही महिलाओं के लिए आपातकालीन स्थितियों में रहने की एक सुरक्षित जगह और मानसिक एवं सामाजिक काउंसलिंग भी उपलब्ध करवाना है.

कैदियों का मानसिक स्वास्थ्य

जेल के भीतर मानसिक विकलांगता से जूझ रहे कैदियों की देखभाल का मकसद आखिर क्या है?

जेल एक ऐसी जगह है जो असल में चारों तरफ से दीवारों से घिरी हुई है. इसके साथ यह हमारे समाज का हिस्सा है भी और नहीं भी है. इन दोनों बातों में एक विरोधाभास है. जेल वो जगह है जो संदेह और अविश्वास के ज़रिए अकेलेपन को बढ़ावा देती है. तो, यह एक ऐसी जगह है जो खुशी के बिलकुल खिलाफ है.

पुलिस सदैव (किसकी) सेवा में?

आपराधिक न्याय प्रणाली की खामियां न तो छुपी हुई हैं और न ही ये कोई नई खोज हैं. लेकिन जिस चीज़ पर अभी भी ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया है, वह यह है कि कैसे ब्राह्मणवादी व्यवस्था, अपराधीकरण और हमारी पुलिसिंग प्रणाली के हर स्तर पर घुस चुकी है?

पितृसत्ता और हिंसा को समझने में अक्सर हम किस तरह की गलतियां करते हैं?

जेंडर आधारित हिंसा पर काम करने वाले लोग प्यार को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते, क्योंकि यह अक्सर हिंसा की कहानियों का अहम हिस्सा होता है – कई बार यह मुख्य भूमिका में होता है. पितृसत्ता के साथ किए गए समझौते सिर्फ़ समझौते होते हैं, या ये महिलाओं के लिए अपनी ज़िंदगी चलाने की ज़रूरी रणनीतियां होती हैं?

आप सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हैं

नारीवादी और सामाजिक न्याय समर्थकों ने ‘निगरानी’ को जेल के संदर्भ में ही नहीं बल्कि हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उसकी उपस्थिति और इन दोनों जगहों के बीच की कड़ियों को भी खोलने का काम किया है. क्या हमारी ज़िंदगियां भी ‘कार्सरैलिटी या कैद’ के सिद्धांतों से संचालित होती है? क्या बंदिश, निगरानी, और दंड इसका प्रतिनिधित्व करते हैं? सार्वजनिक स्थानों में होने वाली हिंसा हमारे जीवन में ‘कैद’ के तर्क को मज़बूत करने में किस तरह की भूमिका निभाती है?

प्रसव और गरिमा: स्वास्थ्य के नाम पर गर्भवती महिलाओं के साथ हिंसा

इरावती, इंदौर के पास के छोटे से गांव बेगमखेडी की रहने वाली है. जब वह अपनी पहली डिलीवरी के लिए इंदौर के सरकारी अस्पताल में भर्ती हुई, तो उसे उम्मीद नहीं थी कि पहली संतान के होने की खुशी, इतनी जल्दी ज़िंदगी भर के सदमे में बदल जाएगी.

“सब जानता हूं कि तुम लोग क्या खाते हो, क्या नहीं.”

‘खाना’ शब्द सुनते ही भूख सी लगने लगती है. तरह-तरह के व्यंजन और पकवान दिमाग में घूमने लगते हैं. लेकिन मेरे लिए यह जीभ, पेट या मन की भूख को मिटाने का साधन भर नहीं है. इसके साथ मेरा एक अजीब ही रिश्ता है. इसे लेकर मेरे दिल और दिमाग में एक डर सा बैठा रहता है, या यूं कहें कि यह डर बिठाया गया है. ये वो डर है जो बचपन से अब तक गया नहीं.

दिल्ली की दीवार

अपराध संस्करण में हम हिंदी की मूल कहानियों के ज़रिए भी अवधारणाओं पर बात करने की कोशिश कर रहे हैं. इस कड़ी में पेश है दूसरी कहानी – दिल्ली की दीवार. इस कहानी के लेखक हैं प्रतिष्ठित एवं चर्चित साहित्यकार उदय प्रकाश.