समाज

जहां हम राज्य, कानून, जाति, धर्म, अमीरी–ग़रीबी और परिवार की मिलती बिछड़ती गलियों के बीच से निकलते हैं और उन्हें आंकते हैं. यह समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे ये ढांचे अपने आप को नए ढंग और नए रूप से संचित करते हैं, फैलते और पनपते हैं. इस सबमें पितृसत्ता जीवन के अलग–अलग अनुभवों पर कैसे अपनी छाप छोड़ती है.

नर्सिंग और जाति की दर्जाबंदी

स्वास्थ्य सेवाओं के भीतर छूत-अछूत का मसला ही नहीं जेंडर भी यहां अपना रंग दिखाता है। ज़्यादातर नर्स महिलाएं हैं और इसके कारण कई तरह की जाति और जेंडर से जुड़ी दर्जाबंदी साफ़ दिखाई देती है।

आपको संघबद्ध क्यों होना चाहिए?

एनी राजा नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (NFIW) की महासचिव हैं. अपने वजूद में आने के 65 से अधिक सालों में यह फेडरेशन उन मुद्दों के साथ लामबंद होता रहा है जो कामगार के तौर पर महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित करते हैं.

वे महिलाएं जो फ़िल्म रचती हैं

क्या आपको वह आखिरी फिल्म याद है जिसे आपने देखा था? आपके द्वारा देखी गई वह कौन-सी अंतिम फिल्म थी जिसका निर्देशन किसी महिला ने किया था?

महिला किसान

अगर औरत किसानी कर सकती है, तो वह मालिक क्यों नहीं हो सकती?

कैसा दिखता है या दिखती है एक किसान? आपके मन में इसकी जो छवि उभरी है, मुमकिन है कि यह एक मर्द की छवि हो. यह कहना ठीक है कि यह एक रूढ़ छवि है.

मेरा ये मतलब नहीं था

“मुझे लगा वो शर्मीली है, मगर उसने तो शिकायत दर्ज कर दी”

द थर्ड आई के साथ बातचीत में ‘पार्टनर्स फॉर लॉं इन डेवलपमेंट’ की मधु मेहरा सहमति, अस्वीकृति और चाहत को समझने में हमारी मदद कर रही हैं.

घरेलू कामगार

वे यहां आती ही क्यों हैं?

घरेलू कामगार औरतों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती, उत्तरी दिल्ली स्थित ‘राष्ट्रीय घरेलू कामगार यूनियन’ की संस्थापक, सुनीता रानी से बातचीत.

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