भाषा

शब्दों की आड़ में

मेरी एक छात्रा हुआ करती थी जो बहुत कम बोलती थी. बस उतना ही बोलती जितने की उसे ज़रूरत होती, वो भी काफी कम. ऐसा नहीं है कि उसे बोलने से डर लगता था या वह संकोची रही हो. बस अपने शब्‍दों को लेकर वह इतना सतर्क रहती थी कि जब तक समझ न आए क्‍या बोलना है, वह चुप रहती थी.

दिल्लीः लटकनवाली हिंदी यानी हिंग्लिश का शहर

अपने भाषाई प्रयोग और कहने के अंदाज़ से दिल्ली एक दिलचस्प शहर है. सत्ता के इस शहर में लाखों कामगार – छोटे दुकानदार दिहाड़ी जिस पंजाबी-हरियाणवी, बिहारी-भोजपुरी के प्रभाव के साथ हिंदी का प्रयोग करते हैं, उस हिंदी में अंग्रेज़ी और उसके शब्द एक ख़ास किस्म की लटकन है.

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