पॉडकास्ट

फ से फ़ील्ड, श से शिक्षा: एपिसोड 5 भूचाल

हुआ यूं कि गीता के मोहल्ले से एक लड़की, किसी दूसरी जाति के अपने लड़के दोस्त (ब्यॉफ्रेंड) के साथ घर छोड़कर भाग गई. इस घटना से पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच चुका था. अब इसका असर तो हर घर पर पड़ना ही था. कैसे? जानने के लिए सुनिए रानी की कहानी भूचाल.

फ से फ़ील्ड, श से शिक्षा: एपिसोड 4 शादी, पर क्यों?

उसने अभी-अभी कॉलेज की परीक्षा पास की है. इससे पहले कि वो आगे की पढ़ाई के बारे में सोच पाता, परिवार वालों ने उसकी शादी तय करने का फैसला कर लिया. अचानक अपनी ज़िंदगी में आई इस परेशानी से वो युवा लड़का बहुत बेचैन हो उठा. अभी उसकी उम्र ही क्या है, वो अभी शादी नहीं करना चाहता!

फ से फ़ील्ड, श से शिक्षा: एपिसोड 3 अचूकी और उसकी मम्मी

अचूकी से तो आप मिल ही चुके हैं. हैरत की बात यह है कि उसके मारवाड़ी समुदाय के लोग हमेशा उसके पीछे पड़े रहते हैं. वे अक्सर उसकी मां के कम पढ़े-लिखे होने का मज़ाक बनाते हैं. अपने सपनों और इच्छाओं को पूरा करने की उसकी ज़िद के लिए वे अचूकी की भी टांग-खिंचाई करते रहते हैं. क्या अचूकी चुपचाप उनकी बातें यूं ही सुनती रहेगी या उन्हें करारा जवाब देगी? या फिर बीच का रास्ता अपना लेगी? जानने के लिए सुनिए अचूकी की कहानी, खुद उसकी ज़ुबानी.

फ से फ़ील्ड, श से शिक्षा: एपिसोड 2 अचूकी और मारवाड़ी फैमिली

फ से फ़ील्ड, श से शिक्षा के दूसरे एपिसोड में सुनते हैं मनीषा को. अपनी धारदार हाज़िर-जवाबी और अविराम बोलते रहने की ज़बरदस्त कला के ज़रिए अचूकी अपने नाम को सार्थक बनाती है. जितना उत्साह उसके भीतर अपनी कहानियों को लेकर दिखाई देता है, ठीक उसके उलट अपने मारवाड़ी बनिया समुदाय के बारे में बात करते हुए वह किसी अबूझ पहेली की तरह उलझी नज़र आती है.

फ से फ़ील्ड, श से शिक्षा: एपिसोड 1 तुम कितना पढ़ी हो?

फ से फ़ील्ड, श से शिक्षा के पहले एपिसोड में सुनते है खुशी को. दूसरों की ज़िंदगी में टांग अड़ाना अक्सर लोगों का फेवरेट टाइमपास होता है. यूं कह लें कि सबसे पसंदीदा काम. खुशी के लिए भी यह नई बात नहीं थी कि लखनऊ की गलियों में राह चलते कोई उसे टोककर सवाल कर दे.

एकल इन द सिटी, एपिसोड 04: मराठवाडा का एकल महिला संगठन

निरंतर पॉडकास्ट के सीरीज़ ‘एकल इन द सिटी’ में हम शहरों और गांवों की कई एकल आवाज़ों से आपकी मुलाकात करवाते रहे हैं. इस बार एपिसोड 4 में एक आवाज़ नहीं बल्कि मिलिए मराठवाडा, महाराष्ट् के एकल महिला संगठन से. मतलब एकल महिलाओं का समूह!

त्रिदेवी

मीना, एनी और नयनतारा – सेंट एग्निस कॉलेज में पढ़ने वाली तीन लड़कियां, तीन दोस्त – जो दुनिया को अपने कंधे पर उठाए नाचती फिरती हैं. वे दुनिया पर राज करती हैं, कम से कम अपने कॉलेज पर तो ज़रूर करती हैं! वे कॉलेज फेस्टिवल्स की जान हैं.

गुलाबी टॉकीज़

एक सिनेमाघर, मल्टीप्लेक्स, सिंगल स्क्रीन पर्दे की किसी शहर के बनने में क्या भूमिका होती है? क्या ये सिर्फ़ बड़े पर्दे पर किसी कहानी को हमारे लिए जीवित भर करते हैं या ये शहर के भीतर रह रहे किरदारों की ज़िन्दगियां भी बदलते हैं.

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