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जेल सुधार

फ से फ़ील्ड, ज से जेल: सरिता और मैडम – एपिसोड 4

सरिता और मैडम के इस चौथे और आखिरी एपिसोड में क्रुपा उस याद को साझा कर रही है जब सरिता एक बार फिर प्रयास के पास आती है लेकिन इस बार वो कुछ और ही चाहती है – इस बार वो सीखना चाहती है.

फ से फ़ील्ड, ज से जेल: सरिता और मैडम – एपिसोड 3

सरिता जब भी प्रयास के दरवाज़े खट-खटाती है तो इसका मतलब परेशानी ही नहीं होता, जो वो अपने साथ लाती है. कभी वो कुछ मसलों के ऐसे अनोखे हल भी ढूंढ लाती है जो हमें परेशानी को अलग नज़रिए से देखने पर मजबूर कर देते हैं. इस तीसरे एपिसोड में क्रुपा हमें सरिता के उस एक खास दिन के बारे में बता रही हैं जब उसने मोल-भाव करने से साफ इंकार कर दिया.

फ से फ़ील्ड, ज से जेल: सरिता और मैडम – एपिसोड 2

लॉकडाउन तो आपको याद है न? ऐसा नहीं लगता कभी कि ये बरसों पहले की बात हो? और कभी लगता है कि ये कल की ही बात है! जो भी है ये सभी के लिए भयानक ही था. ऐसे समय में जब हर कोई परेशान था तो सेक्स वर्कर्स कैसे अपना जीवन गुज़ार पा रही थीं? और एक सामाजिक कार्यकर्ता किस तरह की चुनौतियों का सामना कर रही थी? सरिता और मैडम के इस दूसरे एपिसोड में क्रुपा हमें यही बताने वाली हैं कि लॉकडाउन के दौरान सरिता ने क्या किया.

फ से फ़ील्ड, ज से जेल: सरिता और मैडम – एपिसोड 1

‘फ से फ़ील्ड ज से जेल’ पॉडकास्ट सीरीज़ के इस नए सीज़न में हम लाएं हैं जेल के भीतर से कहानियां.

द थर्ड आई में हमारा काम फ़ील्ड की समझ को विस्तार देना भी है. हम फ़ील्ड पर काम करने वाले लोगों की कहानियों को सामने लाने का प्रयास करते हैं जो अपने अनोखे अंदाज़ के साथ इसे जीवंत बनाते हैं.

“मैं जेल के भीतर काम करती हूं. मैं जिनके साथ काम करती हूं वे कैदी है. तो मैं कौन हूं?”

रविवार की शाम अक्सर जेल विज़िट की प्लॅनिंग में चली जाती है. जेल में जो हमारे क्लाइंट्स हैं उनके परिवारवालों, वकील या किसी भी और तरह का फॉलो-अप करना है, वो सारा काम रविवार की शाम तक निपटाना होता है क्योंकि सोमवार को जेल जाना है.

विशेष फीचर: तुम्हारे नाम…

मैं जेल के भीतर काम करती हूं. मैं जिनके साथ काम करती हूं वे कैदी है. तो मैं क्या हूं? सामाजिक कार्यकर्ता भी कई तरह के होते हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं. पर, अक्सर जेल के भीतर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं से पूछा जाता है कि, “कोई जेल में क्यों काम करना चाहेगा?”

कैसे सामाजिक कार्यकर्ता कैदियों को कानूनी भूलभुलैया में रास्ता दिखाते हैं

यह लेख सामाजिक कार्य (सोशल वर्क) के क्षेत्र में काम करने वाले उन पेशेवरों एवं छात्रों की बात करता है जिन्हें कैदियों के साथ काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. यह उन महत्त्वपूर्ण बिंदुओं का पता लगाने का काम करता है जिन्हें इस काम के दौरान पार करने की ज़रूरत होती है ताकि एक ऐसी आबादी के साथ काम किया जा सके जिसके बारे में मौजूदा आख्यान सकारात्मक नहीं होते.

कहते हैं कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, पर क्या होगा जब कानून का दिल भी बहुत बड़ा हो?

पुनर्स्थापनात्मक न्याय/ रिस्टोरेटिव जस्टिस के दूसरे हिस्से में पढ़िए ज़मीनी स्तर पर यह कैसे काम करता है और जेल में बंद महिला कैदियों के जीवन में इसकी क्या भूमिका है.

क्या किसी अपराधी द्वारा माफी मांग लेना, उसे जेल भेजकर सज़ा दिलाने से ज़्यादा न्यायपूर्ण है?

दो भागों में प्रकाशित यह लेख पुनर्स्थापनात्मक न्याय / रिस्टोरेटिव जस्टिस से हम क्या समझते हैं, इसकी संभावनाओं और प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बात करता है, खासकर भारत के संदर्भ में. लेख का पहला भाग पुनर्स्थापनात्मक न्याय के दुनिया में उभार पाने, भारत में किशोर न्याय कानून के साथ समानता, यौन अपराधों में भूमिका एवं मध्यस्तता से बिलकुल अलग होने के बारे में है.