
सवाल ही सवाल हैं, सूझता नहीं कोई रास्ता
किशोरावस्था में मन के भीतर जिज्ञासाओं का अंबार होता है. दोस्तों के बीच होने वाली फुसफुसाहटे, मैग्ज़ीन के पन्नों में छपी तस्वीरें या टीवी पर दिखाई देने वाले दृश्य मन में तरंगों पैदा करती हैं. एकतरफ मज़ा आता है तो दूसरी तरफ डर लगता है कि ये जो महसूस हो रहा है, ये क्या है?






