ऑनलाइन शिक्षा का क्या मतलब है? क्या समान रूप से सभी बच्चों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुंच पा रही है? क्या छात्र इंटरनेट या उपकरण जुटा पा रहे हैं? शिक्षा के क्षेत्र में इस विकल्प पर उनके क्या विचार हैं? शहरों से मीलों दूर गांवों और कस्बों की ज़मीनी हक़ीकतें क्या हैं?
‘टीचर टॉक्स’ शृंखला ने ऐसे शिक्षकों से आपको मिलाया जिन्होंने कोविड के समय में छात्रों तक पहुंचने के लिए नए-नए प्रगतिशील तरीके निकाले और ऑनलाइन शिक्षा को लॉकडाउन के दौरान एक सशक्त विकल्प के रूप में उभारा. इस शृंखला पर काम करने के दौरान हमने सोचा क्यों न एक अलग नज़रिए से भी इस शिक्षा को देखें – छात्रों की नज़र से. क्या उन तक ऑनलाइन शिक्षा पहुंच पा रही है? क्या छात्र इंटरनेट या उपकरण जुटा पा रहे हैं? शिक्षा के क्षेत्र में इस विकल्प पर उनके क्या विचार हैं? शहरों से मीलों दूर क्या ज़मीनी हक़ीकतें हैं?
एक तरफ शहरी क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से लैस बच्चे हैं जिनके लिए ऑनलाइन शिक्षा के पैटर्न को अपनाना उतना मुश्किल नहीं था वहीं ग्रामीण क्षेत्र में बच्चे हैं जिनके लिए रोज़मर्रा की परेशानियां उन्हें कोविड में शिक्षा से और दूर करती गई हैं.
कहीं घर में स्मार्ट मोबाईल नहीं है तो कहीं एकांत में बैठकर पढ़ाई कर पाने की सुविधा. लड़कियों के लिए यह और भी मुश्किल का समय है क्योंकि घर पर रहते हुए उन्हें घर का काम भी करना पड़ता है और पढ़ाई भी. कई लड़कियों का कहना है कि, “जिस तरह का कंसंट्रेशन स्कूल में संभव हो पाता है वैसा घर पर नहीं होता. इसलिए होमवर्क कर पाना भी बहुत मुश्किल होता है.
ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े कई सवाल और बच्चों की प्रतिक्रिया जानने के लिए निरंतर ट्रस्ट से अनीता ने (प्रतापगढ़ में ग्रामीण विकास सेवा संस्थान और बहराइच में टाटा ट्रस्ट की भागीदारी में) कुछ छात्रों से बात की और उनकी आवाज़ हम तक पहुंचाई,
आइये देखें हमने क्या पाया.


