
कोरोना वायरस और वैक्सीन: जानें और समझें.
लॉकडाउन में घर के अंदर पूरी तरह बंद होने के बाद आज, लगभग 18 महीने के बाद हम धीरे-धीरे घर से बाहर निकलकर अपने दफ़्तर जा रहे हैं, दोस्तों-रिश्तेदारों से मिल रहे हैं. कैसे? इसकी एक बड़ी वजह है कोरोना की वैक्सीन.
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शहर अकेला है, लाख हैं गलियां

लॉकडाउन में घर के अंदर पूरी तरह बंद होने के बाद आज, लगभग 18 महीने के बाद हम धीरे-धीरे घर से बाहर निकलकर अपने दफ़्तर जा रहे हैं, दोस्तों-रिश्तेदारों से मिल रहे हैं. कैसे? इसकी एक बड़ी वजह है कोरोना की वैक्सीन.

कोविड की दूसरी लहर के दौरान लोग न केवल बीमारी से परेशान थे बल्कि भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी से बेहाल वे अनाज के एक-एक दाने के लिए तड़प रहे थे. हाशिए पर रह रहे लोगों के लिए यह दोहरी मार है. मनीषा ने बाकि साथियों के साथ मिलकर द थर्ड आई रिलीफ़ वर्क के ज़रिए फलौदी गांव के कई इलाकों में घूम-घूम कर अनाज बांटने का काम किया ताकि लोगों को थोड़ी राहत मिल सके.