अंक 004: शिक्षा

नारीवादी शिक्षा: अनुभवों और सवालों की धारा में

चाह और फ़र्ज़ के बीच फैला नूर

वह 2006 का एक यादगार दिन था. रियाध में मेरे अब्बा के चचेरे भाई जुमे की नमाज़ के बाद घर आए हुए थे. अम्मी  ने उस दिन कोरमा बनाया था. दस्तरख्वान पर बैठकर हम सब ने कोरमा खाने के बाद कहवा पिया.

दाई

बोलती कहानियां Ep 5: बेनी मां

बोलती कहानियां के इस एपिसोड में स्वाती कश्यप से सुनिए लेखक हरीश मंगल की कहानी ‘बेनी मां’ का हिंदी अनुवाद. इस कहानी की मुख्य किरदार हैं बेनी मां, जो आम तो बेचती ही हैं, साथ ही वे दाई के काम में भी बहुत कुशल हैं. पर, बेनी मां की ये कुशलता भी उन्हें गांववालों के साथ खड़े होने की जगह नहीं देती. क्यों?

मराठवाड़ा का एकल महिला संगठन

एकल इन द सिटी Ep 4: मराठवाड़ा का एकल महिला संगठन

अपने ही रंग में नहाऊं मैं तो, अपने ही संग मैं गाऊं. एक सवाल – वे महिलाएं जिन्होंने अपनी मर्ज़ी से अपने पति को छोड़ दिया है, उनके लिए हिंदी, अंग्रेज़ी या किसी भी भाषा में कौन सा शब्द है? अगर, आपको नहीं पता तो हम बताते हैं -एमएनटी (MNT) – मी नवराएला टाकले – यानी, मैंने पति को छोड़ा!

भारी भरकम भाषा के पीछे असल मतलब छिप जाते हैं_भाषा

शब्दों की आड़ में

मेरी एक छात्रा हुआ करती थी जो बहुत कम बोलती थी. बस उतना ही बोलती जितने की उसे ज़रूरत होती, वो भी काफी कम. ऐसा नहीं है कि उसे बोलने से डर लगता था या वह संकोची रही हो. बस अपने शब्‍दों को लेकर वह इतना सतर्क रहती थी कि जब तक समझ न आए क्‍या बोलना है, वह चुप रहती थी.

त्रिदेवी

विशेष फीचर: त्रिदेवी – ऑडियो कहानी

मीना, एनी और नयनतारा – सेंट एग्निस कॉलेज में पढ़ने वाली तीन लड़कियां, तीन दोस्त – जो दुनिया को अपने कंधे पर उठाए नाचती फिरती हैं. वे दुनिया पर राज करती हैं, कम से कम अपने कॉलेज पर तो ज़रूर करती हैं! वे कॉलेज फेस्टिवल्स की जान हैं. डांस में उनका कोई सानी नहीं. 

बात छिड़ेगी तो दास्तान बन जाएगी

ज़िंदगी में सबसे पहले हम अपनी सोच को एक संगठित तरीके से पेश करना कहां सीखते हैं? किस तरह की कल्पना और तथ्य के मिश्रण से इस सोच का जन्म होता है? वे कौन से कारक हैं जो एक सोच की उत्पत्ति से अभिव्यक्ति तक के फासले को प्रभावित करते हैं?

क्या आपको लाइब्रेरी का पता मालूम है?

भोपाल में रहने वाली सबा का मानना है कि “शिक्षा के बारे में स्कूल के बाहर बात की जानी चाहिए, स्कूल के बाहर स्टुडेंट होना ज़्यादा आसान है.” सबा भोपाल में 2010 से शिक्षक साथियों (पुस्तकालय के भूतपूर्व सदस्य) की मदद से ‘सावित्री बाई फुले फातिमा शेख पुस्तकालय’ चला रही हैं.

मेकिंग टेक्स्ट्बुक फेमिनिस्ट: किताबों को नारीवादी बनाने की ओर

2005, में निरंतर संस्था ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के आग्रह पर बच्चों की पाठ्य- पुस्तिकाओं को ‘जेंडर संवेदनशील’ बनाने का काम किया था. निरंतर संस्था द्वारा तैयार की गई किताबें 15 साल से भारतीय स्कूलों में पढ़ाई जा रही हैं. इस साल 2022 में इनमें से जाति पर कुछ पाठ्यक्रमों को हटा दिया गया है.

लाइफ इन 10 – हमारी ज़िंदगी में आम्बेडकर

2022 में डॉ. भीमराव आम्बेडकर की 131वीं जयंती पर द थर्ड आई ने कुछ शिक्षकों से बात की और उनसे जाना कि शिक्षण कार्य से जुड़े होने पर सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में आम्बेडकर उन्हें कैसे प्रभावित करते हैं.

“लाल मिर्च हरी मिर्च मिर्च बड़ी तेज़, देखने में भोली-भाली लेकिन दीदी बड़ी तेज़’’

महिलाओं और किशोरियों के साथ उनकी साक्षरता पर काम करते हुए मुझे कुछ 20 साल से भी ज़्यादा समय हो गया है. चिट्ठी लेखन मुझे आज भी साक्षरता और शिक्षा कार्यक्रम की सीखने-सिखाने की पद्धति के रूप में एक महत्त्वपूर्ण साधन या टूल लगता है.

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