उर्वशी वशिष्ट के लेख

उर्वशी वशिष्ट एक स्वतंत्र शोधकर्ता, टीचर, लेखक और संपादक हैं. वे दिल्ली में रहती हैं. उन्होंने विश्वविद्यालयों, प्रकाशन, और विकास क्षेत्र में काम किया है और इन दिनों वे जानवरों के अधिकारों, घरेलू हिंसा, और नॉन कमफरमेटिव जेंडरनेस पर काम कर रही हैं.

असम का यह स्कूल युवाओं को डाक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माताओं में बदल रहा है

दिसंबर 2014 से असम के तेजपुर शहर में स्थित ‘द ग्रीन हब’ संस्था ने यहां के शिक्षकों, वन संरक्षकों, फ़ुटबॉल खिलाड़ियों, गाइडों, छात्रों और आसपास के राज्यों से आए युवाओं को डाक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माताओं में बदल दिया है.

क्वीयर घर: बसने-बसाने का काम, भाग-2

क्या ऐसा कोई तरीका हो सकता है कि घर बसाने के इस काम से उस जेंडर पहचान को अलग रखा जाए जिसे ये ‘स्वाभाविक रूप से’ बढ़ावा देता लगता है?

“मुझे लगा वो शर्मीली है, मगर उसने तो शिकायत दर्ज कर दी”

द थर्ड आई के साथ बातचीत में ‘पार्टनर्स फॉर लॉं इन डेवलपमेंट’ की मधु मेहरा सहमति, अस्वीकृति और चाहत को समझने में हमारी मदद कर रही हैं.

वे यहां आती ही क्यों हैं?

घरेलू कामगार औरतों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती, उत्तरी दिल्ली स्थित ‘राष्ट्रीय घरेलू कामगार यूनियन’ की संस्थापक, सुनीता रानी से बातचीत.