हमारे बीच में, दो महिलाओं के जीवन में जाति की रेखाओं को टटोलने और उसे पर्दे पर उभारने की यात्रा है. जाति पर फिल्म कैसे बनाते हैं? क्या है जो हम दिखा सकते हैं और क्या नहीं? गुस्सा, खीझ, अपमान जैसी भावनाओं को पर्दें पर कैसे दिखाया जाता है?
दो महिलाएं, उत्तर प्रदेश के ललितपुर में रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमारी और नई दिल्ली में रहनेवाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर रुचिका साथ मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में जाति की अदृश्य लेकिन चारों ओर विद्यमान उपस्थिति को सहज और साफ तरीके से कैमरे में कैद करती हैं.
संपादन: गुरलीन ग्रेवाल और रुचिका नेगी.
निर्माता: रफ ऐजेज़.