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बोलती कहानियां: दाई

बोलती कहानियां के इस नए एपिसोड में सुनिए लेखक हरीश मंगल की कहानी का हिन्दी अनुवाद – दाई. दाई कहानी की मुख्य किरदार हैं- बेनी मां, जो आम तो बेचती ही हैं, साथ ही वे दाई के काम में भी बहुत कुशल हैं.

एकल इन द सिटी, एपिसोड 04: मराठवाडा का एकल महिला संगठन

निरंतर पॉडकास्ट के सीरीज़ ‘एकल इन द सिटी’ में हम शहरों और गांवों की कई एकल आवाज़ों से आपकी मुलाकात करवाते रहे हैं. इस बार एपिसोड 4 में एक आवाज़ नहीं बल्कि मिलिए मराठवाडा, महाराष्ट् के एकल महिला संगठन से. मतलब एकल महिलाओं का समूह!

त्रिदेवी

मीना, एनी और नयनतारा – सेंट एग्निस कॉलेज में पढ़ने वाली तीन लड़कियां, तीन दोस्त – जो दुनिया को अपने कंधे पर उठाए नाचती फिरती हैं. वे दुनिया पर राज करती हैं, कम से कम अपने कॉलेज पर तो ज़रूर करती हैं! वे कॉलेज फेस्टिवल्स की जान हैं.

सिटी गर्ल्स

उत्तर-प्रदेश के बांदा ज़िले से आई दो लड़कियां उमरा और कुलसुम, झोला उठाकर दिल्ली महानगर में ठसक से अपना रास्ता बनाती हुई चलती हैं. कैमरा उनके पीछे-पीछे चलता है. 28 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म में वे सारी दकियानूसी बातें जो लड़कियों को अक्सर सुनने को मिलती हैं, कांच की तरह टूटकर गिरते हुए दिखाई देती हैं.

एकल इन द सिटी, एपिसोड 03: अकेले और चलना चाहिए

एकल इन द सिटी के इस तीसरे एपिसोड में मिलिए अनु से जो छत पर बने अपने कमरे से हमारा परिचय करवाती हैं. आज से करीब 76 साल पहले वर्जिनिया वुल्फ ने अपने लेख ‘अ रूम ऑफ़ वन्स ओन’ में लिखा था कि रचनात्मक रचने के लिए लड़कियों और महिलाओं के पास अपना एक कमरा होना चाहिए.

वापसी

साल 2020 में कोविड के दौरान देशभर में लगे लॉकडाउन की वजह से ज्योति अपने गांव सवाऊ मूलराज वापस लौटती हैं. उन्होंने गांव में रहते हुए वहां के परिदृश्य, लोगों औऱ घटनाओं को अपने कैमरे में कैद करना शुरू किया.

दाम्पत्य और असंतोषः एक कहानी तस्वीरों की ज़ुबानी

1870 और 1920 के बीच की अवधि को पूरे भारत में दाम्पत्य/नव दाम्पत्य परियोजना (विवाहित जोड़े की एक नई कल्पना) को आगे बढ़ाने का उत्तम समय माना जा सकता है और यह महाराष्ट्र में भी बहुत अच्छी तरह से दिखाई देता है.

एकल इन द सिटी, एपिसोड 02: एकल परिवार

एकल इन द सिटी के दूसरे एपिसोड में माधुरी की मुलाक़ात उत्तर-प्रदेश में रहने वाली दो एकल महिलाओं से होती है. 27 वर्षीय सीमा, पेशे से पत्रकार हैं और 28 साल की शब्बो, बुंदेलखंड स्थित महिला अधिकार समूह ‘वनांगना’ की कार्यकर्ता हैं. इस एपिसोड में शब्बो और सीमा, दोनों ही खुलकर अपनी बातें साझा कर रही हैं. वे बताती हैं कि कैसे उन्हें शहर के भीतर एकल परिवार मिला.

एकल इन द सिटी, एपिसोड 01: ख़ुदा हाफ़िज़

महानगरों या बड़े शहरों से दूर किसी सुदूर इलाके में एकल महिला होने के क्या अर्थ हैं? शहरों की रुमानियत से दूर ऐसी जगहों पर एक महिला के अकेले रहने के अनुभव कैसे होते हैं? कोई एकल क्यों होता है? कौन से शब्द हैं जो इसे परिभाषित करते हैं? क्या यह संपूर्ण जीवन है या जीवन का एक हिस्सा?

मन के मुखौटे, एपिसोड 03: मैंने साफ किया तुम्हारा…

मानसिक स्वास्थ्य के तयशुदा खांचे से बाहर निकल, उसे आपबीती और जगबीती के अनुभवों एवं कहानियों के चश्मे से समझने की एक महत्वाकांक्षी पहल – मन के मुखौटे- के ज़रिए हम एक बार फ़िर वापस मानसिक स्वास्थ्य की तरफ़ मुड़कर देख रहे हैं. इस पॉडकास्ट सीरीज़ के नए एपिसोड में हम – देखभाल से जुड़े मुद्दों पर सवालों और अनुभवों के ज़रिए इसे समझने का प्रयास कर रहे हैं.

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