अंक 003

शहर

शहर अकेला है, लाख हैं गलियां

October 2021
अंक 003 : शहर
कल्पनाओं और जगमगाती रौशनियों का शहर. तमन्नाओं और चाहतों का शहर. विस्थापन के दंश के साथ जीता शहर तो सपनों के टूटने और पूरे होने का शहर. आकर्षण और इससे दूर भागने की कशमकश, ये सब एक ही शहर के भीतर हैं.

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