हम

जहां हम खोजते हैं सत्ता का हमसे, हमारी सोच, हमारे अस्तित्व, हमारी देह और आत्मीयता से क्या रिश्ता है. हम जो अपने अंदर असीम अभिलाषाएं, आकांक्षाएं समेटे हुए हैं. हमारे भीतर कुछ चाहतें भी हैं, कुछ छोटेमोटे विरोध भी हैं. हम जिनमें मुहब्बतों की ख्वाहिशें भी हैं और हिंसा की संभावनाएं भी. हम जिसके ज़रिए राष्ट्र अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करता है. हमारा यह तन और मन हमारी बनती बिगड़ती पहचानों का महल है और यादों का मकबरा भी. आए दिन इसमें कला और खूबसूरती की रासलीला भी खेली जाती है.

लाइफ इन फाइव: संगीता जोगी

संगीता जोगी कलाकार हैं. वे मज़दूरी भी करती हैं. अपने दो बच्चों और परिवार के साथ संगीता राजस्थान के माउंटआबू ज़िले के काचौरी गांव में रहती हैं. हाल ही में तारा बुक्स से प्रकाशित उनकी चित्रात्मक किताब ‘द विमेन आई कुड बी’ पढ़ी-लिखी आज़ाद ख़्याल महिलाओं की कहानी चित्रों के ज़रिए उकेरती है.

क्वीयर

वे कौन सी जगहें हैं जहां मैं सबसे ज़्यादा क्वियर होता हूं?

अचल, द थर्ड आई शहर संस्करण के ट्रैवल फेलो प्रोग्राम का हिस्सा हैं. उनके द्वारा बनाया गया तीन हिस्सों में बंटा यह कॉमिक्स सीरीज़ एक क्वियर की नज़र से शहर को देखने का प्रयास है.

किसी की ज़िंदगी का स्टेपनी

वड़ोदरा, गुजरात में पढ़ाई कर रहे ट्रैवल फेलो अचल, चित्रों और शब्दों के ज़रिए शहर के किस्सों को काग़ज़ पर उतारते हैं. तीन हिस्सों में बंटा यह कॉमिक्स सीरीज़ एक क्वियर की नज़र से शहर को देखने का प्रयास है.

बलकट्टी-परकट्टी

पटनावाली की दूसरी क़िस्त में स्वाती हमें मिला रही हैं ‘संस्कारानंद’ से जिनकी तर्क-विद्या से आपके भी होश उड़ जाएंगें. एक ट्रेनिंग के दौरान 16 साल के लड़के से हुई मुलाक़ात और उसकी परेशानी का कारण जानने के बाद यह कहना अतिश्योक्ति नहीं कि महिलाओं को अपनी पसंद के कपड़े पहनने, बाल कटवाने या कहीं आने-जाने जैसी छोटी-छोटी आज़ादियों के लिए कई सवालों का जवाब देना पड़ता है.

हम का गाय बैल हैं?

पटना में रहनेवाली स्वाती को कहानियां सुनना-सुनाना पसंद है. वे रोज़मर्रा की ठेठ कहानियों को अपने बिहारी तड़के के साथ हमारे सामने ला रही हैं. स्वाती इन कहानियों के ज़रिए कुछ बेड़ियों को टटोलती हैं और उन्हें चुनौती देती हैं.

मोमो वाली आंटी!

दिल्ली की गर्मी के थपेड़े चेहरों की नमी नोच रहे हैं पर इस भीषण मौसम को दरकिनार करते हुए ‘डोलमा आंटी मोमो’ की दुकान के आगे ग्राहकों की भूखी भीड़ एक प्लेट मोमो हासिल करने के लिए डटी हुई है. दुकान का नामकरण डोलमा सेरिंग के नाम पर हुआ है, जिन्हें प्यार से सब आंटी डोलमा बुलाते हैं.

शोकनाच

शहर ख़ुद में क्या महसूस करता है. शहर के भीतर तमाम तरह की घटनाएं रोज़ होती हैं. कुछ इतिहास बन जाती हैं और कुछ के साथ हम वर्तमान में जीते रहते हैं. इन घटनाओं का शहर के मन पर क्या असर होता है? पढ़िए शहर में रहने वाली और उसके दो साथियों – हवा और उदासी के बीच की बातचीत.

दरभंगा_विकलांगता

कितकित

कितकित का खेल. सब आंखें तुम पर टिकी हैं. और तुम खड़े हो एक खाने के बीच, एक टांग पर. झुककर उठाते हुए गोटी. कंगारू की छलांग. टक, टक, टक. अपने आप को गिरने मत देना, झुको, उठाओ गोटी, और फिर से लौट जाओ, जहां से शुरुआत की थी.

जेल_अधिकार

“स्वास्थ्य का अधिकार हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है, चाहे वह जेल के भीतर हो या बाहर”

अनुभव अत्रेय पेशे से वकील हैं और असम के शोध-संगठन स्टूडियो नीलिमा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. सुधार-गृहों में अपने काम के ज़रिए अनुभव नीतियों पर शोध के साथ ही न्यायिक सेवाओं और ज़रूरी मुक़दमों में भी मदद करते हैं.

“महिला हिंसा सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा है.”

स्वास्थ्य, निजी होकर भी सार्वजनिक है. भारत में स्वास्थ्य सुविधाएं सभी को प्राप्त नहीं हैं. हालांकि हमारा संविधान यह मानता है कि स्वास्थ्य का अधिकार हमारे मौलिक अधिकारों का भाग है. जेंडर के आधार पर भी कई सवाल हैं. जन स्वास्थ्य व्यवस्था सीरीज़ की इस कड़ी में हमने महाराष्ट्र स्थित सेहत संस्था से बात की.