अंक 003: शहर

शहर अकेला है, लाख हैं गलियां

कहानी घर घर की

पटना में रहनेवाली स्वाती रोज़मर्रा की ठेठ कहानियों को अपने बिहारी तड़के के साथ हमारे सामने ला रही हैं. पटनावाली की तीसरी क़िस्त में वे हमें सुना रही हैं कहानी घर घर की.

दिल्ली

दिल्ली की सड़कों पर घूमते हुए

शहर जहां अपने लोगों को पहचान देता है वहीं इसकी भीड़ में बहुत आसानी से गुम हुआ जा सकता है. पर, क्या ये सभी के लिए संभव है? क्या होता है जब शहर किसी को अलग-थलग कर दे? क्या शहर का नक्शा हर तरह के व्यवहार और नज़रियों को ज़ेहन में रखकर तैयार किया जाता है?

लाइफ इन फाइव: संगीता जोगी

संगीता जोगी कलाकार हैं. वे मज़दूरी भी करती हैं. अपने दो बच्चों और परिवार के साथ संगीता राजस्थान के माउंटआबू ज़िले के काचौरी गांव में रहती हैं. हाल ही में तारा बुक्स से प्रकाशित उनकी चित्रात्मक किताब ‘द विमेन आई कुड बी’ पढ़ी-लिखी आज़ाद ख़्याल महिलाओं की कहानी चित्रों के ज़रिए उकेरती है.

क्वीयर

वे कौन सी जगहें हैं जहां मैं सबसे ज़्यादा क्वियर होता हूं?

अचल, द थर्ड आई शहर संस्करण के ट्रैवल फेलो प्रोग्राम का हिस्सा हैं. उनके द्वारा बनाया गया तीन हिस्सों में बंटा यह कॉमिक्स सीरीज़ एक क्वियर की नज़र से शहर को देखने का प्रयास है.

किसी की ज़िंदगी का स्टेपनी

वड़ोदरा, गुजरात में पढ़ाई कर रहे ट्रैवल फेलो अचल, चित्रों और शब्दों के ज़रिए शहर के किस्सों को काग़ज़ पर उतारते हैं. तीन हिस्सों में बंटा यह कॉमिक्स सीरीज़ एक क्वियर की नज़र से शहर को देखने का प्रयास है.

“आदिवासी बचेंगे तो जंगल बचेंगें”

नक्शा ए मन शृंखला की इस दूसरी कड़ी में प्रकाश और बाओ एक विकृत दुनिया और उसकी उलटबासियों को समझने की कोशिश कर रहे हैं जो आदिवासियों को ‘बाहरी’ समझती हैं.

ख़ुदा हाफ़िज़

एकल इन द सिटी Ep.1: ख़ुदा हाफ़िज़

महानगरों या बड़े शहरों से दूर किसी सुदूर इलाके में एकल महिला होने के क्या अर्थ हैं? शहरों की रुमानियत से दूर ऐसी जगहों पर एक महिला के अकेले रहने के अनुभव कैसे होते हैं? कोई एकल क्यों होता है? कौन से शब्द हैं जो इसे परिभाषित करते हैं? क्या यह संपूर्ण जीवन है या जीवन का एक हिस्सा?  

सफर का ही था मैं सफर का रहा…

कल रात सोने में देर हुई इसलिए सुबह देर से उठा. दातून करने, नहाने जैसे रोज़ के कामों को निपटा कर एक दो लोगों से फोन पर बात की, एक सेब काटकर नाश्ता किया और तैयार होकर कमरे से बाहर आ गया. बाहर मेरी गाड़ी खड़ी थी. उसपर कपड़ा मारने के बाद अपने काम पर निकल पड़ा.

छत

गुमसुम सी छत

मोहल्ले के तमाम घरों को जोड़ती छतें खुली और विशाल दिखाई देती हैं. ठीक उसके उलट हमारा अन्तर्मन कई तरह की घेरों में बंधा होता है. इसी बीच ज़िंदगियां चलती-बदलती रहती हैं. अंकुर संस्था से जुड़ी रौशनी की इस बयानी में छत किसी अंदर-बाहर की अदला-बदली को चरितार्थ करती हुई दिखाई देती है. कोविड का समय एवं मानसिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर लोगों पर पड़े उसके प्रभावों को रौशनी बहुत ही सीधे शब्दों में सामने रख देती हैं.

शहर जैसे आग का दरिया

ये कहानी एक प्रेम कहानी है जिसमें तीन किरदार हैं – एक भाई, एक बहन और एक स्मार्टफोन. और एक की मौत हो जाती है. जिगर मुरादाबादी ने कहा है कि – ये इश्क़ नहीं आसां इतना ही समझ लीजे/एक आग का दरिया है और डूब कर जाना है… ये कहानी भी ऐसे ही एक दरिया की दास्तां हैं.